Pawan Singh Bhojpuri Life: भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के पावर स्टार पवन सिंह का सफर संघर्ष, मेहनत और समर्पण की मिसाल है। बिहार के आरा जिले के जोकहरी गांव में 6 मार्च 1986 को जन्मे पवन सिंह ने अपनी प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के बल पर भोजपुरी सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
पवन सिंह का प्रारंभिक जीवन
पवन सिंह का संगीत के प्रति झुकाव बचपन से ही था। उन्होंने अपने चाचा अजीत सिंह से संगीत की शिक्षा ली जो खुद एक संगीतकार थे। कम उम्र में ही उन्होंने स्टेज शो करना शुरू कर दिया था। स्टेज शो करने से उनकी गायकी में निखार आया और धीरे-धीरे गायिकी के क्षेत्र में वह स्थापित होते चले गए।
पवन सिंह ने लॉलीपॉप लागेलू गाना गया तो इतना प्रसिद्ध हुआ कि उन्हें देश-विदेश में लॉलीपॉप सिंगर के नाम से जाना जाने लगा। पवन सिंह का यह गाना आज भी लोगों की पहली पसंद है। भारत ही नहीं बल्कि भारत के बाहर भी कई देशों में यह गाना सुनने को मिल जाता है।
संगीत करियर की शुरुआत
पवन सिंह ने अपने किशोरावस्था में पहला म्यूजिक एल्बम ओढ़निया वाली लॉन्च किया। हालांकि उन्हें असली पहचान 2008 में आए गाने लॉलीपॉप लागेलू से मिली। इस गाने ने न केवल भोजपुरी दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रियता हासिल की। यह गाना आज भी आधुनिक भोजपुरी संगीत का पर्याय माना जाता है।
भोजपुरी संगीत की दुनिया में सफलता के बाद पवन सिंह ने 2004 में फिल्म रंगली चुनरिया तोहरे नाम से अभिनय की दुनिया में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्हें संघर्ष का सामना करना पड़ा लेकिन अपनी मेहनत और अभिनय कौशल के दम पर उन्होंने दर्शकों के दिलों में जगह बनाई।
व्यक्तिगत जीवन की चुनौतियाँ
पवन सिंह का व्यक्तिगत जीवन भी संघर्षों से भरा रहा है। 2014 में उन्होंने नीलम सिंह से विवाह किया लेकिन दुर्भाग्यवश 2015 में नीलम ने आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पवन सिंह को गहरे सदमे में डाल दिया। बाद में 2018 में उन्होंने ज्योति सिंह से विवाह किया लेकिन यह रिश्ता भी विवादों में रहा और 2022 में उन्होंने तलाक की अर्जी दी।
पवन सिंह का करियर भी विवादों से अछूता नहीं रहा है। 2019 में अभिनेत्री अक्षरा सिंह ने उन पर धमकी देने और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए। इसके अलावा, उनके वैवाहिक जीवन से जुड़े विवाद भी मीडिया की सुर्खियों में रहे हैं।
पवन सिंह का राजनीतिक सफर
संगीत और अभिनय के अलावा पवन सिंह ने राजनीति में भी कदम रखा। 2014 में वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बिहार के काराकट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया जिसके परिणामस्वरूप भाजपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया।
लोकसभा चुनाव में काराकाट सीट से चुनाव लड़ने के बाद पवन सिंह ने अच्छी खासी वोट भी हासिल किया। पवन सिंह की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि काराकट लोकसभा सीट से नामांकन के बाद उन्हें लोगों द्वारा काफी सपोर्ट किया गया। पहली बार ही उन्होंने काराकाट लोकसभा सीट पर रिकॉर्डतोड़ वोट हासिल किया।